गॉलब्लैडर (पित्ताशय) और बाईल डक्ट कैंसर

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गॉलब्लैडर (पित्ताशय) और बाईल डक्ट कैंसर

Gall-Bladderगॉलब्लैडर कैंसर देश में एक गंभीर समस्या बना हुआ है, गॉलब्लैडर कैंसर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होता है। दरअसल पित्ताशय की पथरी वाले लोगों में गॉलब्लैडर कैंसर या बाईल डक्ट कैंसर होने का जोखिम अधिक होते हैं। बाईल डक्ट कैंसर के मामले एशिया में सबसे अधिक पाए जाते हैं। ये लिवर फ्ल्यूहक पैरासाईट, स्लेरोसिंग कोलेनजाईटिस, अल्सिरेटिव कोलाईटिस और साइरोसिस तथा सिरोसिस संक्रमणों से जुड़े होते हैं। कैसे पहचाने गॉलब्लैडर कैंसर और क्या है इसका कारक इस बारे में जानकारी दे रहे हैं जीवक आयुर्वेदा के निदेशक टी के श्रीवास्तव।

पेट के ऊपरी हिस्से में यकृत के नीचे मौजूद पित्ताशय अर्थात गॉलब्लैडर एक छोटा, नाशपाती के आकार के अंग होता है, इसकी कोशिकाओं में अनियंत्रित बढ़त होने पर यह गॉलब्लैडर पित्ताशय और बाईल डक्ट कैंसर बन जाता है।

पित्ताशय के कैंसर के सामान्य लक्षण

पेट दर्द: पित्ताशय के कैंसर में अधिकांश लोगों को पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होता है। यदि पित्त की पथरी या कैंसर पित्त नली (ब्लाॅक) को अवरुद्ध कर रहा है तो तेज दर्द हो सकता हैं।

मतली या उल्टी: पीलिया: पित्ताशय के कैंसर से ग्रसित 50% व्यक्तियों में पीलिया होता है।
पीलिया मे त्वचा और आँखो का सफेद हिस्सा पीला हो जाता है। पीलिया रक्त में बिलिरूबिन (एक रसायन जो पित्त को पीला रंग देता है) के संचयन होने के कारण होता है। पित्त जिगर से आँतो में प्रवाह नही कर पाता। इस वजह से बिलिरूबिन रक्त व उत्तकों में जमा हो जाता हैं। यह खुजली, पीला मूत्र या हल्के रंग का मल जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। पीलिया होने का यह मतलब नहीं की आपको पित्ताशय का कैंसर है। पीलिया का एक और आम कारण जिगर में एक वायरस संक्रमण (हैपेटाइटिस) है। लेकिन अगर पीलिया जी.बी.सी के कारण है, तो यह कैंसर के एक उन्नत चरण को इंगित करता है।
पेट में गाँठ: यदि कैंसर का विकास पित्त नलिकाओं को अवरुद्ध कर देता है तो पित्ताशय की थैली का आकार अपने सामान्य आकार से बड़ा हो जाता है। यह पेट के दाहिने हिस्से में एक गाँठ के रूप में उभर सकता है।

जीवनशैली सम्बंधित कारक

मोटापा- अत्यधिक मोटापा विभिन्न तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है जिनमें पित्ताशय का कैंसर भी शामिल है। मोटापे का सीधा संबंध पित्ताशय के कैंसर से है। मोटापे संबंधी कैंसरो से महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर और पुरुषों में लिवर कैंसर पहले स्थान पर है और पित्ताशय का कैंसर दूसरे स्थान पर हैं। मोटापा पित्त की पथरी के लिये जोखिम कारक है जिसका पित्ताशय के कैंसर से सीधा संबंध है। ऐसा अनुमान है कि पुरुषो में दस में से एक एवं महिलाओं में पाँच में से एक पित्ताशय के कैंसर का सीधे मोटापे से संबंध है।
आहार: आहार में प्रोटीन और वसा की अधिकता तथा सब्जियों, फलों व फाइबर की कम मात्रा जी.बी.सी के लिये एक जोखिम कारक है।

आयुर्वेद में है इसका इलाज़

आयुर्वेद में रस रसायन का उपयोग कर गॉलब्लैडर कैंसर को पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है, जीवक आयुर्वेदा में गॉलब्लैडर कैंसर के विभिन्न मरीजों का इलाज़ हुआ है। बिभिन्न प्रकार के रस रसायन एवं पंचकर्मा विधि का उपयोग कर गॉलब्लैडर कैंसर का इलाज़ सम्भव हुआ है।


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छोटे नींबू के लाभ बड़े

नींबू एक ऐसा फल है जिसकी खुशबू मात्र से ही ताजगी का अहसास होता है। नींबू का अनोखा गुण यह है कि इसकी खट्टी खुशबू खाने से पहले ही मुँह में पानी ला देती है। चाट हो या दाल कोई भी व्यंजन इसके प्रयोग से और भी सुस्वादु हो जाता है। यह फल खट्टा होने के साथ-साथ बेहद गुणकारी भी है। आइए जानते हैं इसके कुछ प्रयोगों के बारे में-

यह वजन कम करने में मददगार है

क्या आप जानते हैं कि यदि शरीर में संतुलन की कमी है तो वजन कम करना काफी मुश्किल भरा होता है। हैप्पी- हैल्दी बॉडी और तेज दिमाग वजन कम का सबसे अच्छा तरीका है। ज्यादा क्षारीय खाना आपको खुश रखता है और पोषाहार से सम्बंधित मैगजीन्स के अनुसार क्षारीय खाना खाने वाले लोग जल्दी वजन कम कर लेते हैं। इसके अलावा नींबू में पेक्टिन फाइबर होते हैं जो कि भूख बढ़ाने में मददगार हैं। अब तक आप समझ गए होंगे यदि नहीं तो हम आपको नींबू पानी के कुछ और फायदे बता रहे हैं।
1) कृमि रोग
10 ग्राम नींबू के पत्तों का रस (अर्क) में 10 ग्राम शहद मिलाकर पीने से 10-15 दिनों में पेट के कीड़े मरकर नष्ट हो जाते हैं। नींबू के बीजों के चूर्ण की फंकी लेने से कीड़ों का विनाश होता है।
2) शिरशूल
नींबू के पत्तों का रस निकालकर नाक से सूँघे जिसे व्यक्ति को हमेशा सिरदर्द बना रहता है, उसे भी इससे शीघ्र आराम मिलता है।
3) चेहरे की सुंदरता के लिए
10 ग्राम नींबू का रस 10 बूँद ग्लिसरीन तथा 10 ग्राम गुलाबजल इन तीनों को मिलाकर रख लें। यह एक प्रकार से लोशन सा तैयार हो जाएगा। इस लोशन को प्रतिदिन सुबह स्नान के पश्चात तथा रात्रि सोने के पूर्व हल्के-हल्के मलने से चेहरा रेशम की तरह कोमल बन जाएगा।
नींबू के रस में बराबर की मात्रा में गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। आधे घंटे बाद ताजे जल से धो लें। चेहरे पर मुँहासे बिल्कुल साफ हो जाएँगे। यह प्रयोग करीब 10-15 दिनों तक करें।
4) जीभ विकार
नींबू के रस में थोड़ा सेहुड़ का दूध मिलाकर मुख में लगाने से जीभ के समस्त प्रकार के विकार मिट जाते हैं।
5) नकसीर
ताजे नींबू का रस निकालकर नाक में पिचकारी देने से नाक से खून गिरता हो, तो बंद हो जाएगा।
6) तृष्णा
किसी कारण से प्यास लगती हो, तो नींबू चूसने या शिकंजी पीने से तुरंत प्यास बंद हो जाती है। इसे तेज बुखार में दिया जा सकता है।
7) बालों का झड़ना व रूसी
नींबू के रस में दो गुना नारियल का तेल मिलाकर हल्के हाथों से सिर पर मालिश करने से बाल झड़ना बंद हो जाते है व बाल मुलायम भी हो जाते है तथा रूसी से मुक्त हो जाते हैं। यदि सिर में रूसी हो, तो नींबू के रस में नारियल का तेल मिलाकर रात को सिर में मलने से और सुबह गुनगुने जल और अरीठे के पानी से सिर धोएँ। 2-4 बार यह क्रिया करने से खुश्की नष्ट हो जाती है।
8) मिर्गी
चुटकी भर हींग को नींबू में मिलाकर चूसने से मिर्गी रोग में लाभ होगा।
9) पायरिया
नींबू का रस व शहद मिलाकर मसूड़ों पर मलते रहने से रक्त व पीप आना बंद हो जाएगा।
10) दाँत व मसूड़ों का दर्द
दाँत दर्द होने पर नींबू को चार टुकड़ों में काट लीजिए, इसके पश्चात ऊपर से नमक डालकर एक के बाद एक टुकड़ों को गर्म कीजिए। फिर एक-एक टुकड़ा दाँत व दाढ़ में रखकर दबाते जाएँ व चूसते जाएँ, दर्द में काफी राहत महसूस होगी। मसूड़े फूलने पर नींबू को पानी में निचोड़ कर कुल्ले करने से अत्यधिक लाभ होगा।
11) दाँतों की चमक
नींबू के रस व सरसों के तेल को मिलाकर मंजन करने से दाँतों की चमक निखर जाएगी।

12) हिचकी
एक चम्मच नींबू का रस व शहद मिलाकर पीने से हिचकी बंद हो जाएगी। इस प्रयोग में स्वादानुसार काला नमक भी मिलाया जा सकता है।

13) खुजली
नींबू में फिटकरी का चूर्ण भरकर खुजली वाले स्थान पर रगड़ने से खुजली समाप्त हो जाएगी।

14) जोड़ों का दर्द
इस दर्द में नींबू के रस को दर्द वाले स्थान पर मलने से दर्द व सूजन समाप्त हो जाएगी।

15) पीड़ा रहित प्रसव
यदि गर्भधारण के चौथे माह से प्रसवकाल तक स्त्री एक नींबू की शिकंजी नित्य पीए तो प्रसव बिना कष्ट संभव हो सकता है।

16) मूत्रावरोध
नींबू के बीजों को महीन पीसकर नाभि पर रखकर ठंडा पानी डालें, रुका हुआ पेशाब खुलकर व साफ आ जाता है।

17) तपेदिक
नींबू के 25 ग्राम रस में 11 तुलसी के पत्ते तथा जीरा, हींग व नमक स्वादानुसार इन सबको गर्म पानी में मिलाकर पीने से तपेदिक रोग में लाभ होगा।

18) साँस फूलना
नींबू के रस में शहद मिलाकर चाटने से काफी राहत महसूस होगी।

 


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कैंसर (कर्कटा अर्बुद): कैसे करें बचाव ?

cancerकैंसर (अर्बुद) आज एक भयावह बीमरी के रूप में बढ़ रहा है हमारे आहार विहार का प्रभाव सीधा हमारे शरीर पर पड़ता है जिसके कारण हमें बड़ी बिमारियों का सामना करना पड़ता है। कैंसर (अर्बुद) क्या है कैसे होता है बता रहें है जीवक आयुर्वेदा के निदेशक टी के श्रीवास्तव।

कैंसर (अर्बुद) उन असामान्य कोशिकाओं के कारण होता है जो तेज़ी से बढ़ती हैं। आपके शरीर के लिए यह असामान्य बात है कि वह पुरानी कोशिकाओं को नई कोशिकायों से बदले, पर कैंसर की कोशिकाएँ बहुत अधिक तेज़ी से बढ़ती हैं।

कुछ कैंसर कोशिकाएँ वृद्धियाँ उत्पन्न कर सकती हैं जिन्हें अर्बुद (ट्यूमर) कहा जाता है। सभी अर्बुद आकार में बढ़ते हैं पर कुछ अर्बुद तेज़ी से बढ़ते हैं, जब कि अन्य धीमी गति से बढ़ते हैं।

अर्बुदों के प्रकार

कई बार अर्बुद कैंसरकारी नहीं होते हैं इन्हें अहानिकर अर्बुद कहा जाता है वे काफी हद तक स्वस्थ ऊतकों की कोशिकाओं जैसी कोशिकाओं से बने होते हैं। इस प्रकार का अर्बुद एक ही जगह स्थिर रहता है और वह स्वस्थ ऊतकों और अंगों में नहीं फैलता।
कैंसर के अर्बुदों को हानिकारक (मेलिग्नंट) ट्यूमर भी हानिकारक (मेलिग्नंट) कहा जाता है। इन अर्बुदों से कैंसर रक्त और लसीका (लिम्फ) प्रणालियों के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है।
जब कैंसर फैलता है, तो इसे रोग व्याप्ति (मेटास्टासिस) याप्ति (मेटास्टासिस) कहा जाता है। कैंसर की कोशिकाएँ ट्यूमर से, जिसे प्राथमिक जगह कहा जाता है, रक्त या लसीका प्रणाली के जरिये शरीर के अन्य भागों में फैल जाती हैं।

कैंसर के प्रकार

कैंसर के कई प्रकार हैं।
कार्सिनोमा कैंसर का सबसे आम प्रकार है। फेफड़े, आंत, स्तन और डिंब ग्रंथियों के कैंसर आमतौर पर
इस प्रकार के कैंसर होते हैं।
सारकोमा अस्थि, उपास्थि, वसा और मांसपेशी में पाया जाता है।
लिम्फोमा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिम्फ नोडों में आरम्भ होता है। इनमें हाॅजकिन्स और गैर-हाॅजकिन्स लिम्फोमा सम्मिलित होते हैं।
ल्यूकेमिया उन रक्त कोशिकाओं में आरम्भ होता है जिनका अस्थि मज्जा में विकास होता है और जो
रक्तप्रवाह में बड़ी संख्या में पाई जाती हैं।

कैंसर के लक्षण

कैंसर के लक्षण अर्बुद के प्रकार और स्थान पर निर्भर होते हैं। हो सकता है कि कुछ कैंसरों में तब तक कोई लक्षण न हों, जब तक कि ट्यूमर बड़ा न हो जाए। आम लक्षणों में निम्नलिखित लक्षण सम्मिलित हैंः

  • अत्यधिक थकान अनुभव करना
  • अज्ञात कारण से वज़न में कमी होना
  • बुखार, कँपकँपी या रात मे पसीना आना
  • भूख में कमी
  • शारीरिक कष्ट या दर्द
  • खांसी, साँस फूलना या सीने में दर्द
  • हैज़ा, कब्ज़ या मल में रक्त
    जब किसी कैंसर का पता लगेगा, तब इस बात की जाँच करने के लिए परीक्षण किए जाएंँगे कि क्या कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल गया है। स्कैनों, एक्स-रे और रक्त के परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है।

आपकी देखभाल

आपका चिकित्सक निम्नलिखित के आधार पर इस बातका निर्णय करेगा कि आपको किस प्रकार के देखभाल की आवश्यकता हैः

  • कैंसर का प्रकार
  • कैंसर कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है
  • क्या कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल गया है
  • आपकी आयु और समग्रता में आपका स्वास्थ्य

कैंसर के सबसे आम उपचार निम्नलिखित हैंः

  • ट्यूमर और इसके पास के ऊतक को हटाने के लिए शल्यचिकित्सा (सर्जरी)
  • ट्यूमर और कैंसर की कोशिकाओं को सिकोड़ने या नष्ट करने के लिए नियंत्रित मात्राओं में विकिरण (रेडिएशन)
  • कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करने या नष्ट करने के लिए रसायनचिकित्सा (कीमोथेरेपी) दवा

लेकिन यह तीनो उपचार मरीजों के लिए नुकसानदायक है । ऑपरेशन के बाद कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की प्रक्रिया और तेज हो जाती है, उसके बाद रेडीएशन एवं कीमोथेरेपी के लिए सलाह दी जाती है, लेकिन रेडीएशन एवं कीमोथेरेपी की वजह से कैसर कोशिकाओं के साथ अच्छी कोशिकाओं को भी डैमेज करता है जिसकी वजह से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और कैंसर कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों से फेल जाती है और बाद में मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।

आयुर्वेद में कैंसर का उपचार

आयुर्वेद द्वारा कैंसर का उपचार पूरी तरह सम्भव है। आयुर्वेद की रस-रसायन चिकित्सा द्वारा कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की प्रक्रिया व मेतास्टासिस की प्रक्रिया को पूरी तरह रोका जा सकता है।आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है और न ही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटती है।कमी है विश्वास की आयुर्वेद पर, अभी भी लोगों का भरोसा नहीं है कि जटिल रोगों का इलाज आयुर्वेद द्वारा हो सकता है। आयुर्वेद में कैंसर का इलाज पुरी तरह सम्भव है ।  4th stage के भी कैंसर आयुर्वेद के द्वारा ठीक होते देखे गए हैं।


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