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सामान्य वात रोग: वात कण्टक (मौच-एड़ी का दर्द)

किसी अस्थिसंधि (ज्वाइंट) के स्नायु (लिगामेन्ट) , जब अपनी क्षमता से अधिक खिंच जाते हैं , तो इस प्रकार की चोट को मोच (sprain) कहते हैं। चोट लगने के साथ ही, सूजन शुरू हो जाती है। मोच किसी भी जोड़ में हो सकता है। पर, एड़ी और कलाई के जोड़ पर ज्यादा मोच आती है।

पैर की एडि़यों में स्थित वात विषम ( ऊंची – नीची ) भूमि पर, पैर रखने से, उसमें दर्द होता है , तो उसे ‘ वात कण्टक ‘ रोग कहते है । अत्यधिक चलने – फिरने से या वात कफ मिलकर,मिलकर, संधियों ( जोडो़ ) में स्थित रक्तवाहिनीयों को खराब कर देता है , तो इस रोग की उत्पत्ति होती है । इस रोग में , गुल्फ – संधियों में दर्द के साथ, सूजन हो जाती है । इससे संधियों में खिचांव होने लगता है । रोगी चलने – फिरने में कठिनाई अनुभव करता है ।

उपचार

1- गर्म पानी में , तारपीन का तेल डालकर, उस पानी से दर्द वाले स्थान की सिकाई करें । ऐसा करने से, सूजन और दर्द में शीघ्रता से आराम होता है ।
2 शहद, चूना व पिसी प्याज को मिलाकर, मौच वाले स्थान पर लेप करने से, सूजन व दर्द में तुरंत लाभ होता है ।
3- आमाहल्दी , प्याज, कालाजीरा, मुसव्वर को कांजी में पीसकर व सरसों के तेल में मिलाकर, उसे गर्म करके मौच पर भाप देने से, आराम मिलता है ।

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