लकवा का इलाज होगा आयुर्वेद से सम्भव

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लकवा का इलाज होगा आयुर्वेद से सम्भव

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  • क्या है लकवा ? (What is the paralysis?)

 

  • पैरालिसिस जिसे हम लकवा से भी जानते है ये बीमारी से शरीर की शक्ति कम हो जाती है उस मरीज को घुमाना -फिराना मुश्किल हो जाता है. लकवा तब होता है जब अचानक दिमाग में लोही (ब्लड) पहोचना बंध या फिर दिमाग की कोई लोही की नली फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकओं के आस पास की जगह पर खून जम जाता है. क्या आप जानते है की लकवा किस-किस को हो सकता है किसी को भी ये बीमारी हो सकती है परंतु जयादा इस रोग आदमिमे दिखाई देता है और ५५ साल की उम्र में ये बीमारी ज्यादा नजर में आती है यह आधे चेहरे पर ही अपना असर दिखाती है . लेकिन तुरंत इलाज के द्वारा इस बीमारी से बच सकते है .लकवा (Paralysis) एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में शरीर का कोई विशेष हिस्सा या आधा शरीर निष्क्रिय व चेतनाहीन हो जाता है। यह बीमारी प्राय: वृद्धावस्था में अधिक होती है।

कारण-: मॉससपेशियों की दुर्बलता, नाड़ियों की कमजोरी तथा बढ़ता हुआ रक्तचाप इस रोग के प्रमुख कारण हैं। जो व्यक्ति अधिक मात्रा में गैस पैदा करनेवाले पदार्थों का सेवन करते हैं, अव्यवस्थित व अत्यधिक संभोग करते हैं, विषम आहार का सेवन करते हैं, ज्यादा व्यायाम करते हैं उन्हें भी यह रोग चपेट में ले लेता है। इसके अलावा उल्टी या दस्तों का अधिक होना, मानसिक दुर्बलता, अचानक शॉक लगने आदि कारणों से भी पक्षाघात या लकवा हो जाता है।

लक्षण:- लकवा आधे शरीर की नाड़ियों व नसों को सुखाकर रक्त संचरण में व्यापक बाधा पहुंचा देता है। इसके कारण शरीर की संधियों तथा जोड़ों में शिथिलता आ जाती है। ग्रसित अंग स्वयं उठ नहीं पाते, भार उठाने तथा चलने की क्षमता पूर्णत: समाप्त हो जाती है। यदि मुंह लकवाग्रस्त हो जाए तो मुंह के अंग भी स्थिर हो जाते हैं, गरदन एक तरफ झुक जाती है, बोलने की शक्ति नष्ट हो जाती है, आखों में दर्द व फड़कन आ जाती है। शरीर में कपकपी होने लगती है। व्यक्ति कुरूप दिखने लगता है।•.

बोलने में तकलीफ. • शरीर सुना सुना लगे. • आँख में धुंधला दिखाई दे. • सिर में दर्द होना. • बेहोश होना. • बाएं पैर या बाएं हाथ से काम न कर पाना. • यादशक्ति कमजोर होना.

  •  ज्यादातर मरीजों को धमनियों में खराबी की वजह से इस बीमारी का शिकार होते है .
  •  या फिर मस्तिष्क की कोई रक्त वहिका फैट जाती है , जिसके कारन रक्त सही तरीके से शरीर के अंगो तक नहीं पहुंच पता है .
  •  मस्तिष्क में अचानक रक्तस्त्राव होना जिसके कारन मरीज के हाथ पैर चलना बंद कर देते है .
  • पैरालिसिस शरीर के किसी भी भाग या मस्तिष्क में कैंसर होने के कारन भी लोग इस परेशानी से ग्रसित हो जाते है .जयादा इस रोग आदमिमे दिखाई देता है. काजूः लकवाग्रस्त व्यक्ति को काजू का भरपूर सेवन कराना चाहिए। । किशमिशः नियमित रूप से किशमिश के सेवन से इस रोग में काफी लाभ होता है।परहेज और आहार
  • लेने योग्य आहार
  • अखरोटः अखरोट के तेल की मालिश और सेमल के पत्तों का बफारा लेने से मुंह का लकवा जल्दी ठीक हो जाता है।
  • उपचार-: अंगूरः अंगूर के रस में बग्गूगोशा या नाशपाती का रस मिलाकर रोगी को नियमित रूप से दिन में दो बार पिलाएं|
  • विटामिन बी काम्प्लेक्स जैसे नायसिन और विटामिन बी12 युक्त भोज्य पदार्थ।
  • वसीय अम्ल युक्त आहार जैसे केले, फलियाँ, दालें, पोषक खमीर, आलू, कद्दू के बीजों का तेल, अखरोट, संतरे, हरी सब्जियाँ, और कम वसा युक्त दूध
  • इनसे परहेज करें
  • कम और बार-बार खाना और आहार की कम मात्रा।
  • वसायुक्त आहारबैठे हुए या लेटे हुए कमजोर अथवा लकवाग्रस्त शारीरिक हिस्सों को चलाना चाहिए।
  • घरेलू उपाय (उपचार)
  • योग और व्यायाम
  • सोने से पहले कुछ ग्लास पानी लेकर अपने शरीर के जलस्तर को बनाए रखें।
  • बिना अवरोध की पूरी नींद लें।
  • योग की खिंचाव वाली मुद्राएँ आपकी माँसपेशियों को आराम देने में सहायता करेगी।
  • ध्यान की सहायता से अपने शरीर को तनावमुक्त करें।
  •  लकवा का आयुर्वेदिक उपचार-
  •  खजूर खुछ दिन तक रोज दूध के साथ खाने से लकवा की बीमारी में फायदा होता है.
  • सूंठ उरद को पानीके साथ मिलकर पिने से थोड़ा गरम करके रोज पिने से लाभदायी है.
  •  नासपती, एप्पल,अंगूर इन सबका बराबर मात्र में जूस बनाकर देने से फायदा होता है ये कुछ दिनों उपाय नियत करने से लकवा की बीमारी दूर होती है.
  •  तुलसी के पत्ते लेकर उबालकर देने से लकवा के रोगी के अंग को बफ देने से लकवा ठीक होने लगता है.
  • योग से सब बीमारी से बच सकते है, प्राणायाम और कपालभाति करने से लाभदायी है.

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वसंत ऋतु में कैसी हो आपकी ऋतुचर्या

basantबसंत ऋतु में कैसा हो आपका खान पान बता रहे हैं बता रहे हैं जीवक आयुर्वेदा के निदेशक टी के श्रीवास्तव 

वसंत ऋतु में आयुर्वेद ने खान-पान में संयम की बात कहकर व्यक्ति एवं समाज की नीरोगता का ध्यान रखा है। इस ऋतु में लाई, भूने हुए चने, ताजी हल्दी, ताजी मूली, अदरक, पुरानी जौ, पुराने गेहूँ की चीजें खाने के लिए कहा गया है। इसके अलावा मूँग बनाकर खाना भी उत्तम है। नागरमोथ अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है। मन को प्रसन्न करें एवं हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव, अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। वसंत ऋतु में आने वाला होली का त्यौहार इस ओर संकेत करता है कि शरीर को थोड़ा सूखा सेंक देना चाहिए जिससे कफ पिघलकर बाहर निकल जाय। सुबह जल्दी उठकर थोड़ा व्यायाम करना, दौडऩा अथवा गुलाटियाँ खाने का अभ्यास लाभदायक होता है। मालिश करके सूखे द्रव्य आँवले, त्रिफला अथवा चने के आटे आदि का उबटन लगाकर गर्म पानी से स्नान करना हितकर है।

इस ऋतु में कड़वे नीम में नयी कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए। 15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्षभर चर्मरोग, रक्तविकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है। धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत (बिना नमक के व्रत) करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप (हाई बी.पी.), गुर्दा (किडनी) आदि के रोग नहीं होते।

वसंत ऋतु दरअसल शीत और ग्रीष्म का सन्धिकाल होती है। सन्धि का समय होने से वसंत ऋतु में थोड़ा-थोड़ा असर दोनों ऋतुओं का होता है। प्रकृति ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि प्राणीजगत शीतकाल को छोडऩे और ग्रीष्मकाल में प्रवेश करने का अभ्यस्त हो जाए। अत: वसंत ऋतु सन्तुलन बनाने की ऋतु है क्योंकि अब ऋतु परिर्वतन के कारण आहार विहार में परिर्वतन करना आवश्यक हो जाता है।

सम्भावित रोग

श्वास, खांसी, बदनदर्द, ज्वर, वमन, अरुचि, भारीपन, भूख कम लगना, कब्ज, पेट दर्द, कृमिजन्य विकार आदि होते हैं।

प्रयोग करें

  • शरीर संशोधन हेतु वमन, विरेचन नस्य, कुंजल आदि।
  • रूखा, कड़वा तीखा, कसैले रस वाले पदार्थों का सेवन।
  • सुबह खाली पेट बड़ी हरड़ का 3-4 ग्राम चूर्ण शहद के साथ रसायन के समान लाभ पहुंचाता है।
  • शुद्ध घी, मधु और दूध की असमान मात्रा में मिश्रण का सेवन करने से शरीर में जमा कफ बाहर निकल आता है।
  • एक वर्ष पुराना जौ, गेहुं व चावल का उपयोग करना उचित है।
  • इस ऋतु में ज्वर बाजरा मक्का आदि रूखे धानों का आहार श्रेष्ठ है।
  • मूंग, मसूर, अरहर, चना की दाल उपयोगी है।
  • मूली, घीया, गाजर, बथुआ, चौलाई ,परवल, सरसों, मैथी, पत्तापालक, धनिया, अदरक आदि का सेवन करना हितकर है।
  • हल्दी से पीला किया गया भोजन स्वास्थ के लिए बहुत उपयोगी होता है क्योंकि हल्दी भी कफनाशक है।
  • सूर्योदय से पूर्व उठकर शौचादि से निवृत होकर योगासन करना चाहिए।
  • तेल की मालिश करना उत्तम है।
  • प्रयोग न करें
  • नए- अन्न, शीतल, चिकनाई युक्त, भारी, खट्टे एवं मीठे द्रव्य, उड़द, आलू, प्याज, गन्ना, नए गुड़, भैंस का दूध व सिंघाड़े का सेवन मना है।
  • दिन में सोना, एक स्थान पर लम्बे समय तक बैठे रहना उचित नहीं है।
  • ठंडे पेय, आइसक्रीम, बर्फ के गोले चॉकलेट, मैदे की चीजें, खमीरवाली चीजें, दही आदि पदार्थ बिल्कुल त्याग देने चाहिए।
  • पचने में भारी पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • चावल खाना ही हो तो दिन में खाना चाहिए, रात में नहीं।

आयुर्वेद के अनुसार बसंत ऋतु में शरीर के श्रुतों ( बॉडी चैनेल्स ) की शुद्धि के लिए पंचकर्म चिकित्सा मुख्य रुप से वमन क्रिया उत्तम मानी जाती है। इस क्रिया के जरिये प्रकुपित कफ शरीर से बाहर निकलता है। पंचकर्म हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सा की देखरेख में ही करना चाहिए। इसके अलावा उदर्वतन (जड़ी बूटी के पावडर के मालिश) करना और गर्म पानी से गरारे करना भी कफ को कम करने में सहायक है।


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वजन कम करना चाहते हैं तो अपनाएं ये तरीके ….

fat-thinभाग दौड़ भरी जीवनशैली में बाहर का बना खाना अब आदत में शामिल होने लगा है   और व्यायाम और सैर के लिए तो न तो समय निकाल पाते है और कुछ आलस के कारण ऐसा नही कर पाते है। आधुनिक युग की जीवनशैली का तो आपको पता ही है , बहुत व्यस्त हो गयी है। आज न तो किसी के  पास  व्यायाम के लिए समय है और न ही घर पर खाना बनाकर खाने का समय है।

परिणामस्वरूप हम अपना पेट तो भर लेते है, परन्तु पोषण अधूरा रह जाता है , इसके अलावा शरीर में अनावश्यक तत्वों का समावेश हो जाता है जो की हमारी चर्बी को बढ़ा कर हमे मोटापा की समस्या का शिकार बना देते है। यह समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।  बड़े शहरों में तो इस समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है।  यह समस्या अनेक बीमारियो को जन्म देती है , जिससे हम बीमारियो की गिरफ्त में पड़ जाते है। और अपने शरीर को बीमारियो का घर बना रहे है। मोटापे  से थाइरोइड , हार्ट अटैक , रक्तचाप, नसों की ब्लॉकेज,  माईग्रैन और ब्रेन ट्यूमर  आदि बीमारियो का खतरा बना रहता है।

 

 वजन बढ़ने के मुख्य कारण :

  • टेलीविज़न देखते हुए स्नैक्स खाते रहने से।
  • शारीरिक मेहनत न करने से।
  • शारीरिक और मानसिक बदलाव की वजह से।
  • शादी के बाद हार्मोनल परिवर्तन की वजह से।
  • थाइरोइड बीमारी की वजह से।
  • व्यायाम के लिए समय नहीं।
  • बार बार खाते रहने से।
  • जल्दी न पचने वाला फ़ास्ट फ़ूड खाने से ।
  • गर्भावस्था के बाद।
  • प्राथमिकताएं बदल जाना।
  • बाहर का खाना खाना।
  • खुद के लिए समय न निकालना।
  • जिन लोगो का व्यवसाय बैठे रहने का है।

कैसे रोकें अपना बढ़ता वजन :

जल्दी उठकर व्यायाम करे –  सुबह जल्दी उठकर व्यायाम  व् सैर अति आवश्यक है।  इससे शरीर को   ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिलती है और कॉर्बन डाई ऑक्साइड बाहर  निकल जाती है। जिससे शरीर की सभी प्रणाली सुचारू रूप से कार्य करती है और शरीर मोटापा का शिकार नही होता।

नींद पूरी ले `पर्याप्त मात्रा में नींद न लेने पर हार्मोन जारी  होते है जिससे शरीर में वसा की  मात्रा बढ़ती है । रात में 6-7 घंटे सोने वाले लोगो को  वजन बढ़ने  की शिकायत कम रहती है ।

गर्भावस्था के बाद व्यायाम आवश्यक– गर्भावस्था के बाद महिलाओं का पेट और कमर का साइज काफी बढ़ जाता है। जिसके लिए व्यायाम काफी आवश्यक है वरना मोटापा और बढ़ता जायेगा।  इसलिए  साथ खुद पर भी ध्यान  देना अति आवश्यक है।

अधिक वसा युक्त और तले हुए पदार्थो से परहेज– अधिक तेल और वसा युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन करने से अतिरिक्त वसा हमारे शरीर में जमा हो जाती है जो बाद में चर्बी का रूप ले लेती है।  इसलिए इन पदार्थो के सेवन से बचे।

बाहर का जल्दी न पचने वाला फ़ास्ट फ़ूड से परहेज करे– बाहर का मैदा से बना जल्दी न पचने वाला खाना खाने से भी मोटापा बढ़ता जा रहा है। इसलिए इन चीजो से जितना हो सके परहेज करे।

पियें ग्रीन टी– रात  को सोने से पहले ग्रीन टी  पिए, क्योकि इसमें मेटबोलिक्स होते है जो सारी रात चर्बी घटाने का काम करते रहते है , जिससे आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा।

पत्ता गोभी खाए – पत्ता गोभी में चर्बी घटाने वाले गुण होते है और इससे शरीर का चयापचय शक्ति शाली होता है। इसलिए इसका सेवन जरूर करे। यह मोटापा घटाने में कारगर है। 


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    I was Visited at Jivak Ayurveda for dengue on 26th August 2016. From day one I have been taken good care of by the Jivak team. I felt like I was treated by my own family. I was also very happy about a patient care attendant who gave me a sponge bath and also came to talk to me when ever possible to reduce my dengue anxiety. He even noticed the small red spots on my back and reported to the nurse. It was very nice to see so much compassion. Hats off to all of you. I made it a point to take the na… Read more

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